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बिलासपुर

हाईकोर्ट से झटका : अनुकंपा नियुक्ति की याचिका खारिज, बेटा होने का सबूत नहीं दे पाया याचिकाकर्ता

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक युवक की अनुकंपा नियुक्ति संबंधी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह मृतक कर्मचारी का पुत्र होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं दे सका। यह मामला हाईकोर्ट के ही एक पूर्व कर्मचारी गणेश नायडू से जुड़ा है, जिनकी मृत्यु 2010 में सेवा काल के दौरान हुई थी।

यदुनंदन नगर निवासी गणेश नायडू हाईकोर्ट में भृत्य पद पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी पूजा नायडू भी उसी समय हाईकोर्ट में कार्यरत थीं। पति की मौत के बाद कुछ समय बाद पूजा नायडू की भी सेवा में रहते मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी बेटी ऋचा नायडू को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी, जो बाद में निरस्त कर दी गई।

इसी क्रम में उसलापुर निवासी नीलकांत नायडू ने फरवरी 2022 में दावा किया कि वह गणेश नायडू का पुत्र है और अब अनुकंपा नियुक्ति का अधिकारी है। लेकिन उसका आवेदन मई 2022 में खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मृतक कर्मचारी ने अपनी सर्विस बुक में केवल पत्नी पूजा और बेटी ऋचा को नामांकित किया था। याचिकाकर्ता का नाम परिवार सूची में दर्ज नहीं था। मृतक की पत्नी पूजा ने हलफनामा देकर स्पष्ट किया था कि ऋचा ही उनकी एकमात्र संतान थी। याचिकाकर्ता ने मृतक की भाभी उषा मूर्ति का शपथ पत्र प्रस्तुत कर कहा कि गणेश की दो पत्नियां थीं – रेशमा और पूजा – और वह रेशमा का बेटा है। लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त प्रमाण नहीं माना।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और मृतक कर्मचारी के संबंधों को लेकर विवाद है, और ऐसे विवादों का निपटारा सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है। इसलिए याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को सिविल कोर्ट में दावा दायर करने की स्वतंत्रता दी गई।

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